अध्याय – 074 षष्ठी तिथि के व्रत

अध्याय – 074 
षष्ठी तिथि के व्रत
अग्निदेव कहते हैं – अब मैं षष्ठी सम्बन्धी व्रतों को कहता हूँ | कार्तिक के कृष्णपक्ष की षष्ठी को फलमात्र का भोजन करके कार्तिकेय लिये अर्घ्यदान करना चाहिये | इससे मनुष्य भोग और मोक्ष प्राप्त करता हैं | इसे ‘स्कन्दषष्ठी – व्रत’ कहते हैं | भाद्रपद के कृष्णपक्ष की षष्ठी तिथि में ‘अक्षयषष्ठी व्रत’ करना चाहिये | इसे मार्गशीर्ष में भी करना चाहिये | इस अक्षयषष्ठी के दिन किसी भी एक वर्ष निराहार रहनेसे मानव भोग और मोक्ष प्राप्त कर लेता हैं ||१-२||

इसप्रकार आदि आग्नेय महापुराण में ‘षष्ठी के व्रतों का वर्णन’ नामक त्रेहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ ||

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